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लाल बहादुर शास्त्री की मौत पर बनी फिल्म के बारे में बोले विवेक, 'मुझे धमकियों भरे कॉल आ रहे हैं'

लाल बहादुर शास्त्री की मौत पर बनी फिल्म के बारे में बोले विवेक, 'मुझे धमकियों भरे कॉल आ रहे हैं'

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विवेक ओबरॉय की विवादित फिल्म 'पीएम नरेंद्र मोदी' के बाद अब विवेक अग्निहोत्री की फिल्म 'द ताशकंद फाइल्स' की रिलीज पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं. पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पोतों ने फिल्म की रिलीज के खिलाफ निर्माताओं को लीगल नोटिस भेजा है.
शास्त्री जी के पोते कांग्रेस से जुड़े हैं. इस फिल्म के खिलाफ कांग्रेस ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और सेंसर बोर्ड को भी ख़त लिखकर शिकायत की गई है. इस लीगल नोटिस से फिल्म के डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री काफी निराश हैं.

उन्होंने हाल ही में इंडिया टुडे से बातचीत में बताया 'हम चाहते हैं कि इस फिल्म के बाद एक जांच बिठाई जाए और पूरी दुनिया को ये पता चले कि आखिर शास्त्री जी को हुआ क्या था और उन्हें किसने मारा था और आखिर हमारे पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या का कारण क्या था.'

विवेक ने ये भी कहा कि शास्त्री जी ने एक बेहद महत्वपूर्ण ट्रीटी पर साइन किए थे और इसके तुरंत बाद उनका निधन हो गया था और ये फिल्म उन्हीं की रहस्यमयी मौत पर आधारित है. उन्होंने कहा कि 'मुझे स्क्रीनिंग को रोकने के लिए कॉल्स आ रहे हैं. मुझे धमकी भरे कॉल्स भी आ रहे हैं. हमने इस फिल्म के लिए पिछले दो सालों में काफी रिसर्च की है और हमने कई आरटीआई भी फाइल किए हैं. हमने सभी जानकारियों को जुटाने के बाद इस फिल्म को पूरी तरह से फैक्ट्स बेस्ड फिल्म बनाया है.'



विवेक अग्रिहोत्री ने कहा कि 'कई इंटरनेशनल एजेंसियों ने शास्त्री जी की मौत पर सवाल उठाए हैं लेकिन उनसे जुड़े किसी भी सवाल के जवाब को नहीं दिया गया है. वे हमारे देश के सबसे बेहतरीन प्रधानमंत्रियों में से एक थे और उनके निधन को 53 साल हो चुके हैं और आज तक भी उनकी मौत एक रहस्य बना हुआ है. उनकी पत्नी हमेशा सरकारी अधिकारियों से उनकी मौत से जुड़े दस्तावेज़ों और पोस्टमॉर्ट्म रिपोर्ट्स की मांग करती रही है लेकिन उन्हें कुछ भी प्रदान नहीं किया गया है.'

हाल ही में इलेक्शन कमीशन ने विवेक ओबरॉय की फिल्म 'पीएम मोदी' की रिलीज पर रोक लगाई थी. फिल्म की रिलीज़ यानि 11 अप्रैल से महज दो दिनों पहले आए इस फैसले से पल्लवी जोशी काफी निराश दिखीं. पल्लवी जोशी ने कहा, 'सीबीएफसी एक सवैंधानिक संस्था है.

वो फिल्मों को सर्टिफाई करती हैं. उनके अपने कायदे कानून हैं. अगर उन्होंने फिल्म को पास कर दिया है तो इस बारे में बात करने का मतलब ही नहीं है. फिल्म की रिलीज से दो दिन पहले कैसे फिल्म को बैन करने से रोका जा सकता है? लेकिन ये भी सच है कि इलेक्शन कमीशन भी एक महत्वपूर्ण संस्था है और उनके पास फैसला लेने का हक है लेकिन एक आर्टिस्ट के तौर पर मैं इस प्रतिबंध से नाखुश हूं. अगर उन्हें फिल्म को चुनाव के समय पर बैन करना ही था तो उन्हें ये काफी पहले करना चाहिए था.'



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