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भारत में सेक्स से जुड़े टैबू को तोड़ेगी ख़ानदानी शफ़ाखाना

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सोनाक्षी सिन्हा की फिल्म ख़ानदानी शफ़ाखाना एक ऐसी चीज़ की बात करती है जिसके बारे में 1.35 बिलियन की आबादी वाले इस देश में सबसे कम चर्चा की जाती है। जी हाँ, सेक्स!हमारी ज़िंदगी से जुड़ी इस फ़िल्म एक छोटे से शहर से आयी पंजाबी लड़की बेबी बेदी की कहानी बयां करती है,
जिसे अपने चाचा से एक सेक्स क्लीनिक विरासत में मिलती है। उसके पूरे सफर के दौरान, यह फिल्म दर्शकों को इस बात का एहसास कराती है कि इस देश के ज़्यादातर हिस्सों में सेक्स अभी भी एक टैबू बना हुआ है और वह समाज में सेक्स से जुड़ी ग़लत सोच को तोड़ने के लिए एक मुहिम छेड़ती है।

इस फ़िल्म के निर्माताओं ने सेक्स से जुड़े टैबू और इससे जुड़ी समस्यायें जो हमारे समाज में लगभग सभी जीवन पर कैसे असर डालती हैं इस बात का विश्लेषण करने और उसे पेश करने के लिए एक मज़ाकिया तरीका अपनाया है। इतना ही नहीं, इस फ़िल्म हमें यह भी पता चलेगा कि कैसे एक पुरुष प्रधान समाज सेक्स से जुड़ी समस्याओं की वकालत करने वाली और खुलेआम उनका इलाज करने वाली लड़की के प्रति प्रतिक्रिया व्यक्त करता है। इस फ़िल्म के बारे में बात करते हुए सोनाक्षी ने कहा, "मैंने इस फिल्म में काम करने का फ़ैसला किया, उसकी ख़ास वजह इसका सब्जेक्ट है और कैसे यह आज के ज़माने से जुड़ा हुआ है। मुझे खुशी है कि शिल्पी ने हमारे देश में सेक्स टैबू के बारे में एक फिल्म बनाने का फैसला किया। यह एक बहुत ही हिम्मत की बात है। मैं लोगों को बेबी बेदी की टैगलाइन को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहूँगी जो है, शर्माओ मत, बात तो करो। निर्देशक शिल्पी दासगुप्ता कहते हैं कि यह बेहद आश्चर्य की बात है कि हिंदुस्तानी लोग इस दुनिया की हर चीज़ के बारे में बहुत लंबी-चौड़ी बहस करते हैं लेकिन सेक्स से जुड़े इस मुद्दे पर बात करने से कतराते हैं। खैर, अब वक़्त आ गया है जब हम सेक्स के बारे में बात करें। मेरा मानना है कि हम इस बारे में जितना जल्दी ज़्यादा खुलेंगे, उतनी ही जल्दी हम एक स्वस्थ समाज में बदलें जायेंगे। फिल्म में वरुण शर्मा और बादशाह भी हैं, जो रुपहले पर्दे पर अपनी शुरुआत कर रहे हैं।
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