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फोटोग्राफ : फिल्म समीक्षा

निर्देशक रितेश बत्रा ने अपनी पहली फिल्म में दिखाया था कि किस तरह से 'लंचबॉक्स' के जरिये रिश्ते बन जाते हैं। 'फोटोग्राफ' में उन्होंने फोटो के जरिये रिश्तों को जोड़ा है। फिल्म 'लंचबॉक्स' में भोजन की महक थी, लेकिन 'फोटोग्राफ' महज एक प्लेन फिल्म है।

गली बॉय : फिल्म समीक्षा

1974 में मनोज कुमार ने 'रोटी कपड़ा और मकान' बनाई थी जिसके जरिये दर्शाया गया था कि हर भारतीय की यह मूलभूत जरूरत है। वक्त में बदलाव नहीं आया है और आज करोड़ों भारतीय अभी भी इससे वंचित हैं।

MOVIE REVIEW : अनदेखे आतंक की दुनिया को दिखाती है राजकुमार राव की 'ओमेर्टा'

निर्देशक हंसल मेहता जब कोई फिल्म लेकर ऑडियंस के सामने आते हैं तो ये तय होता है कि उनकी फिल्म में कुछ तो असामान्य या असाधरण देखने को मिलने वाला है. फिर चाहे हम फिल्म 'शाहिद' की बात करें या फिर 'अलीगढ़' की . फिल्म की कहानी एक ऐसे शख्स के जीवन पर आधारित है जो पढ़ा-लिखा है लेकिन जेहाद और धर्म के नाम पर उसका ब्रेन वॉश कर दिया जाता है. निर्देशक हंसल मेहता इस फिल्म पर पिछले करीब 12 साल से काम कर रहे थे और अब जाकर उनका ये प्रोजेक्ट बनकर तैयार हो सका है.

बदला : फिल्म समीक्षा

सुजॉय घोष की फिल्म 'बदला' स्पैनिश फिल्म 'द इनविज़िबल गेस्ट' से प्रेरित है जिसे थोड़ी-बहुत फेरबदल के साथ हिंदी में बनाया गया है। यह एक थ्रिलर मूवी है जो मुख्यत: दो किरदारों नैना सेठी (तापसी पन्नू) और बादल गुप्ता (अमिताभ बच्चन) के इर्दगिर्द घूमती है।

सब कुछ फिक्स हो सकता है, इश्क नहीं, पढ़ें 'दास देव' का रिव्यू

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जब भी 'देवदास' नाम की दस्तक होती है, अतीत के पन्नों पर सभी पिछली फिल्मों की यादें ताज़ा हो जाती है, चंद सेकेंड के लिए सीन्स, एक्शन और सारी कहानियां एक साथ खयालों की दुनिया से टकरा जाती हैं. यही वजह है कि सुधीर मिश्रा ने जब इस फिल्म का ऐलान किया तो कुछ अलग, नया और ताज़ा की उम्मीदें बंध गई. लेकिन सुधीर के सामने चुनौतियां बहुत थीं.

केदारनाथ : फिल्म समीक्षा

फिल्म केदारनाथ (2018) से सैफ अली खान और अमृता सिंह जैसे सितारों की बेटी सारा अली खान ने अपना करियर शुरू किया है। 35 वर्ष पहले अमृता सिंह ने फिल्म 'बेताब' (1983) से शुरुआत की थी। 'बेताब' के जरिये धर्मेन्द्र के बेटे सनी देओल को लांच किया गया था। तब स्टार के बेटे-बेटियों को लांच करने वाली फिल्मों की कहानी एक सी ही होती थी।

ब्लैकमेल : फिल्म समीक्षा , रेटिंग : 3/5

देव (इरफान खान) अपनी पत्नी रीना (कीर्ति कुल्हारी) को अपने बेडरूम में उसके प्रेमी रंजीत (अरुणोदय सिंह) के साथ पाता है। वह न रीना को मारता है और न ही रंजीत को। वह तीसरा अनोखा रास्ता सोचता है। रंजीत को ब्लैकमेल करने का, लेकिन खुद अपने जाल में फंस जाता है।

2.0 फिल्म समीक्षा

भारतीय सिनेमा इतिहास की सबसे महंगी फिल्म 2.0 में वो रजनीकांत देखने को मिलता है जो पिछली फिल्मों काला और कबाली में देखने को नहीं मिला था। रजनीकांत की फिल्मों से जिस तरह की अपेक्षा रहती है उस पर यह फिल्म पूरी तरह खरी उतरती है। पैसा वसूल तो छोड़िए, आपके चुकाए दामों से कुछ ज्यादा ही दे जाती है।

बागी 2 : फिल्म समीक्षा

टाइगर श्रॉफ ने तेजी से अपनी पहचान एक एक्शन हीरो के रूप में बनाई है। वे मार्शल आर्ट सीखे हुए हैं और स्टंट करने में माहिर हैं। उनकी इसी खूबी और छवि को 'बागी 2' में भुनाया गया है। पूरी फिल्म इस तरह से डिजाइन की गई है कि टाइगर को अपने स्टंट्स दिखाने का मौका मिले और टाइगर ने इसमें कोई कसर बाकी नहीं रखी है। उनके फैंस जो देखना चाहते हैं, उन्हें 'बागी 2' में यह सब देखने को मिलता है, लेकिन जो फिल्म में कुछ अलग देखना चाहते हैं वे अधूरापन महसूस करते हैं ... read more >>
बागी 2 : फिल्म समीक्षा , रेटिंग : 2.5/5

Movie Review: साफ-सुथरी कॉमेडी के साथ खूब हंसाती है Happy Phirr Bhag Jayegi

सिनेमिर्ची :'हैप्पी फिर भाग जाएगी' एक हल्की फुल्की इंटरटेनिंग फिल्म है जो आपको हंसाती है, गुदगुदाती है. ये 2016 की हिट फिल्म 'हैप्पी भाग जाएगी' का सीक्वल है जिसमें डायना पेंटी, जिम्मी शेरगिल, अभय देओल और अली फजल लीड रोल में थे.अब सीक्वल से अभय देओल बाहर हैं और सोनाक्षी सिन्हा, जस्सी गिल की एंट्री हुई है. इस फिल्म की सबसे खूबसूरत बात यही है कि अगर आपने पिछली फिल्म नहीं भी देखी है तो भी इसकी कमी आपको नहीं खलेगी. फिल्म कहीं भटकती नहीं है और सभी एक्टर्स को बराबर मौक भी दिया गया है जो कहीं चूकते नहीं हैं.

अय्यारी : फिल्म समीक्षा , रेटिंग : 2/5

अय्यारी से उम्मीद होना स्वाभाविक है क्योंकि इसे नीरज पांडे ने निर्देशित किया है जिनके नाम के आगे ए वेडनेस डे, स्पेशल 26, बेबी, एमएस धोनी- द अनटोल्ड स्टोरी जैसी अच्छी फिल्में दर्ज हैं, लेकिन अय्यारी में नीरज चूक गए हैं। सेना में व्याप्त भ्रष्टाचार को फिल्म का विषय बनाकर एक थ्रिलर उन्होंने बनाई है, लेकिन यह एक कन्फ्यूज और बेहद लंबी फिल्म बन कर रह गई है।

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