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सब कुछ फिक्स हो सकता है, इश्क नहीं, पढ़ें 'दास देव' का रिव्यू

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जब भी 'देवदास' नाम की दस्तक होती है, अतीत के पन्नों पर सभी पिछली फिल्मों की यादें ताज़ा हो जाती है, चंद सेकेंड के लिए सीन्स, एक्शन और सारी कहानियां एक साथ खयालों की दुनिया से टकरा जाती हैं. यही वजह है कि सुधीर मिश्रा ने जब इस फिल्म का ऐलान किया तो कुछ अलग, नया और ताज़ा की उम्मीदें बंध गई. लेकिन सुधीर के सामने चुनौतियां बहुत थीं.

ब्लैकमेल : फिल्म समीक्षा , रेटिंग : 3/5

देव (इरफान खान) अपनी पत्नी रीना (कीर्ति कुल्हारी) को अपने बेडरूम में उसके प्रेमी रंजीत (अरुणोदय सिंह) के साथ पाता है। वह न रीना को मारता है और न ही रंजीत को। वह तीसरा अनोखा रास्ता सोचता है। रंजीत को ब्लैकमेल करने का, लेकिन खुद अपने जाल में फंस जाता है।

रेड : फिल्म समीक्षा ,रेटिंग : 3/5

80 का दशक और इनकम टैक्स के छापे पर आधारित फिल्म 'स्पेशल 26' वर्ष 2013 में आई थी। अजय देवगन की रेड में भी यही समय है और छापा है, लेकिन 'स्पेशल 26' से यह इस मायने में अलग है कि वहां पर चोरों की गैंग ऑफिसर्स बन कर नकली छापे मारती थी और यहां पर एक ईमानदार ऑफिसर की कहानी है।

बागी 2 : फिल्म समीक्षा

टाइगर श्रॉफ ने तेजी से अपनी पहचान एक एक्शन हीरो के रूप में बनाई है। वे मार्शल आर्ट सीखे हुए हैं और स्टंट करने में माहिर हैं। उनकी इसी खूबी और छवि को 'बागी 2' में भुनाया गया है। पूरी फिल्म इस तरह से डिजाइन की गई है कि टाइगर को अपने स्टंट्स दिखाने का मौका मिले और टाइगर ने इसमें कोई कसर बाकी नहीं रखी है। उनके फैंस जो देखना चाहते हैं, उन्हें 'बागी 2' में यह सब देखने को मिलता है, लेकिन जो फिल्म में कुछ अलग देखना चाहते हैं वे अधूरापन महसूस करते हैं ... read more >>
बागी 2 : फिल्म समीक्षा , रेटिंग : 2.5/5

हिचकी : फिल्म समीक्षा ,रेटिंग : 2/5

हिचकी की हीरोइन नैना माथुर को टूरेट सिंड्रोम है। ये क्या होता है? जब दिमाग के सारे तार आपस में जुड़ नहीं पाते हैं तो व्यक्ति को लगातार हिचकी आती है। अजीब सी आवाज वह निकालता है। नैना के पिता इससे शर्मिंदगी महसूस करते थे इसलिए नैना उन्हें पसंद नहीं करती है। वह टीचर बनने की कोशिश करती है और 18 बार असफल होने के बाद 19वीं बार चुन ली जाती है।

अय्यारी : फिल्म समीक्षा , रेटिंग : 2/5

अय्यारी से उम्मीद होना स्वाभाविक है क्योंकि इसे नीरज पांडे ने निर्देशित किया है जिनके नाम के आगे ए वेडनेस डे, स्पेशल 26, बेबी, एमएस धोनी- द अनटोल्ड स्टोरी जैसी अच्छी फिल्में दर्ज हैं, लेकिन अय्यारी में नीरज चूक गए हैं। सेना में व्याप्त भ्रष्टाचार को फिल्म का विषय बनाकर एक थ्रिलर उन्होंने बनाई है, लेकिन यह एक कन्फ्यूज और बेहद लंबी फिल्म बन कर रह गई है।

हेट स्टोरी 4 : फिल्म समीक्षा , रेटिंग : 1/5

हेट स्टोरी सीरिज का तीखापन और बोल्डनेस अब कम होती जा रही है। इस सीरिज की फिल्में अब महिला अत्याचार पर बातें करे तो हंसी आना स्वाभाविक है क्योंकि इन फिल्मों की कहानी का आधार ही महिला के जिस्म के इर्दगिर्द घूमता है।

रेटिंग : 4/5

महिलाओं में माहवारी एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसका भारतीय समाज में बहुत बड़ा हौव्वा बना कर रखा गया है। इस बारे में बात करते समय लोग असहज हो जाते हैं। माहवारी के दिनों में 82 प्रतिशत महिलाएं गंदे कपड़े, राख और पत्तों का इस्तेमाल करती हैं। उन्हें कोई छूता नहीं है। घर या रसोई से उन्हें बाहर बैठा दिया जाता है। सभी उसे हेय दृष्टि से देखते हैं मानो उसने अपराध कर दिया हो। गरीबी और अशिक्षा इसका मूल कारण है।

सोनू के टीटू की स्वीटी : फिल्म समीक्षा ,रेटिंग : 3/5

बॉलीवुड की ज्यादातर फिल्मों में प्रेमियों को मिलाने की कोशिश की जाती है, लेकिन 'सोनू के टीटू की स्वीटी' में सोनू अपने भाई से भी बढ़ कर दोस्त टीटू की स्वीटी के साथ जोड़ी तोड़ने की कोशिश में लगा रहता है। सोनू को टीटू के लिए स्वीटी सही लड़की नहीं लगती है जिसके साथ टीटू की शादी होने वाली है। रोमांस बनाम ब्रोमांस का मुकाबला देखने को मिलता है।

परी : फिल्म समीक्षा ,रेटिंग : 2.5/5

बॉलीवुड में हॉरर फिल्मों पर उम्दा काम कम हुआ है। वर्षों पहले रामसे ब्रदर्स अपने सीमित साधन के बूते पर फ्रंट बैंचर्स के लिए डरावनी फिल्में बनाते रहे। बाद में यह जिम्मा विक्रम भट्ट ने उठा लिया। एक ही फॉर्मूले पर उन्होंने इतनी सारी फिल्में बना डाली कि फॉर्मूला तार-तार हो गया, दर्शक उब गए, लेकिन विक्रम थके नहीं। बीच में रामगोपाल वर्मा ने कुछ अच्छी हॉरर मूवीज़ बनाई थीं।