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बदला : फिल्म समीक्षा

सुजॉय घोष की फिल्म 'बदला' स्पैनिश फिल्म 'द इनविज़िबल गेस्ट' से प्रेरित है जिसे थोड़ी-बहुत फेरबदल के साथ हिंदी में बनाया गया है। यह एक थ्रिलर मूवी है जो मुख्यत: दो किरदारों नैना सेठी (तापसी पन्नू) और बादल गुप्ता (अमिताभ बच्चन) के इर्दगिर्द घूमती है।

फोटोग्राफ : फिल्म समीक्षा

निर्देशक रितेश बत्रा ने अपनी पहली फिल्म में दिखाया था कि किस तरह से 'लंचबॉक्स' के जरिये रिश्ते बन जाते हैं। 'फोटोग्राफ' में उन्होंने फोटो के जरिये रिश्तों को जोड़ा है। फिल्म 'लंचबॉक्स' में भोजन की महक थी, लेकिन 'फोटोग्राफ' महज एक प्लेन फिल्म है।

केदारनाथ : फिल्म समीक्षा

फिल्म केदारनाथ (2018) से सैफ अली खान और अमृता सिंह जैसे सितारों की बेटी सारा अली खान ने अपना करियर शुरू किया है। 35 वर्ष पहले अमृता सिंह ने फिल्म 'बेताब' (1983) से शुरुआत की थी। 'बेताब' के जरिये धर्मेन्द्र के बेटे सनी देओल को लांच किया गया था। तब स्टार के बेटे-बेटियों को लांच करने वाली फिल्मों की कहानी एक सी ही होती थी।

Movie Review: साफ-सुथरी कॉमेडी के साथ खूब हंसाती है Happy Phirr Bhag Jayegi

सिनेमिर्ची :'हैप्पी फिर भाग जाएगी' एक हल्की फुल्की इंटरटेनिंग फिल्म है जो आपको हंसाती है, गुदगुदाती है. ये 2016 की हिट फिल्म 'हैप्पी भाग जाएगी' का सीक्वल है जिसमें डायना पेंटी, जिम्मी शेरगिल, अभय देओल और अली फजल लीड रोल में थे.अब सीक्वल से अभय देओल बाहर हैं और सोनाक्षी सिन्हा, जस्सी गिल की एंट्री हुई है. इस फिल्म की सबसे खूबसूरत बात यही है कि अगर आपने पिछली फिल्म नहीं भी देखी है तो भी इसकी कमी आपको नहीं खलेगी. फिल्म कहीं भटकती नहीं है और सभी एक्टर्स को बराबर मौक भी दिया गया है जो कहीं चूकते नहीं हैं.

गली बॉय : फिल्म समीक्षा

1974 में मनोज कुमार ने 'रोटी कपड़ा और मकान' बनाई थी जिसके जरिये दर्शाया गया था कि हर भारतीय की यह मूलभूत जरूरत है। वक्त में बदलाव नहीं आया है और आज करोड़ों भारतीय अभी भी इससे वंचित हैं।

2.0 फिल्म समीक्षा

भारतीय सिनेमा इतिहास की सबसे महंगी फिल्म 2.0 में वो रजनीकांत देखने को मिलता है जो पिछली फिल्मों काला और कबाली में देखने को नहीं मिला था। रजनीकांत की फिल्मों से जिस तरह की अपेक्षा रहती है उस पर यह फिल्म पूरी तरह खरी उतरती है। पैसा वसूल तो छोड़िए, आपके चुकाए दामों से कुछ ज्यादा ही दे जाती है।

MOVIE REVIEW : अनदेखे आतंक की दुनिया को दिखाती है राजकुमार राव की 'ओमेर्टा'

निर्देशक हंसल मेहता जब कोई फिल्म लेकर ऑडियंस के सामने आते हैं तो ये तय होता है कि उनकी फिल्म में कुछ तो असामान्य या असाधरण देखने को मिलने वाला है. फिर चाहे हम फिल्म 'शाहिद' की बात करें या फिर 'अलीगढ़' की . फिल्म की कहानी एक ऐसे शख्स के जीवन पर आधारित है जो पढ़ा-लिखा है लेकिन जेहाद और धर्म के नाम पर उसका ब्रेन वॉश कर दिया जाता है. निर्देशक हंसल मेहता इस फिल्म पर पिछले करीब 12 साल से काम कर रहे थे और अब जाकर उनका ये प्रोजेक्ट बनकर तैयार हो सका है.

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