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बत्ती गुल मीटर चालू : फिल्म समीक्षा

टॉयलेट- एक प्रेम कथा में निर्देशक श्री नारायण सिंह ने गांव में शौचालय की शोचनीय स्थिति पर फिल्म बनाई थी। अब उन्होंने बिजली समस्या और बिजली के बढ़े हुए बिलों का मुद्दा 'बत्ती गुल मीटर चालू' में उठाया है। इस मुद्दे के साथ उन्होंने प्रेम-त्रिकोण और दोस्ती/दुश्मनी का चिर-परिचित फॉर्मूला भी डाला है। मनोरंजन और सोशल इश्यु का यह मेल इस बार काम नहीं कर पाया है।

Movie Review: साफ-सुथरी कॉमेडी के साथ खूब हंसाती है Happy Phirr Bhag Jayegi

सिनेमिर्ची :'हैप्पी फिर भाग जाएगी' एक हल्की फुल्की इंटरटेनिंग फिल्म है जो आपको हंसाती है, गुदगुदाती है. ये 2016 की हिट फिल्म 'हैप्पी भाग जाएगी' का सीक्वल है जिसमें डायना पेंटी, जिम्मी शेरगिल, अभय देओल और अली फजल लीड रोल में थे.अब सीक्वल से अभय देओल बाहर हैं और सोनाक्षी सिन्हा, जस्सी गिल की एंट्री हुई है. इस फिल्म की सबसे खूबसूरत बात यही है कि अगर आपने पिछली फिल्म नहीं भी देखी है तो भी इसकी कमी आपको नहीं खलेगी. फिल्म कहीं भटकती नहीं है और सभी एक्टर्स को बराबर मौक भी दिया गया है जो कहीं चूकते नहीं हैं.

धड़क : फिल्म समीक्षा

मराठी में बनी सुपरहिट फिल्म 'सैराट' का हिंदी रीमेक 'धड़क' नाम से बनाया गया है। जिन्होंने 'सैराट' देखी है उन्हें तो 'धड़क' निराश करती ही है और जिन्होंने नहीं भी देखी है उन्हें भी 'धड़क' प्रभावित नहीं कर पाती। धड़क के निर्देशक शशांक खेतान रीमेक में मूल फिल्म की आत्मा नहीं डाल पाए और न ही अपनी ओर से कुछ दे पाए, जिसका सीधा असर फिल्म पर पड़ा है।

MOVIE REVIEW : अनदेखे आतंक की दुनिया को दिखाती है राजकुमार राव की 'ओमेर्टा'

निर्देशक हंसल मेहता जब कोई फिल्म लेकर ऑडियंस के सामने आते हैं तो ये तय होता है कि उनकी फिल्म में कुछ तो असामान्य या असाधरण देखने को मिलने वाला है. फिर चाहे हम फिल्म 'शाहिद' की बात करें या फिर 'अलीगढ़' की . फिल्म की कहानी एक ऐसे शख्स के जीवन पर आधारित है जो पढ़ा-लिखा है लेकिन जेहाद और धर्म के नाम पर उसका ब्रेन वॉश कर दिया जाता है. निर्देशक हंसल मेहता इस फिल्म पर पिछले करीब 12 साल से काम कर रहे थे और अब जाकर उनका ये प्रोजेक्ट बनकर तैयार हो सका है.

गोल्ड : फिल्म समीक्षा

1948 में लंदन में हुए ओलिंपिक में स्वतंत्र भारत ने हॉकी में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता था, लेकिन ये कल्पना है कि एक बंगाली बाबू तपन (अक्षय कुमार) ने यह सपना देखा था और टीम बनाने में अहम योगदान दिया था।

सब कुछ फिक्स हो सकता है, इश्क नहीं, पढ़ें 'दास देव' का रिव्यू

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जब भी 'देवदास' नाम की दस्तक होती है, अतीत के पन्नों पर सभी पिछली फिल्मों की यादें ताज़ा हो जाती है, चंद सेकेंड के लिए सीन्स, एक्शन और सारी कहानियां एक साथ खयालों की दुनिया से टकरा जाती हैं. यही वजह है कि सुधीर मिश्रा ने जब इस फिल्म का ऐलान किया तो कुछ अलग, नया और ताज़ा की उम्मीदें बंध गई. लेकिन सुधीर के सामने चुनौतियां बहुत थीं.

सिनेमिर्ची : 'परमाणु: द स्टोरी ऑफ पोखरण' की कहानी:डायरेक्टर अभिषेक शर्मा की फिल्म 'परमाणु: द स्टोरी ऑफ पोखरण' शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज हो  गई हैं। फिल्म 1998 पोखरण परमाणु परीक्षण पर बनी है। फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है, जिसमें दिखाया गया है कि कैसे यूएस द्वारा सेटेलाइट के माध्यम से नजर रखने के बावजूद इंडियन साइंटिस्ट परमाणु परीक्षण को सफलतापूर्वक अंजाम देते हैं। फिल्म की कहानी शुरू होती है जब प्रधानमंत्री के ऑफिस में चीन के परमाणु परीक्षण के बारे में बातचीत चल रही होती है। तभी आईएएस ऑफिसर अश्वत रैना (जॉन अब्राहम) भारत को भी एक न्यूक्लियर पावर बनने की सलाह देते हैं।

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